हेलो दोस्तों,
मै आज आप को(Bchcho me hone vali bimariya,lkhshn v bchav ke upaya) छोटे बच्चों मेँ होने वाली बीमारियों के कारण व इसके लक्ष्ण और बचाव के बारे मेँ बताउगा। यह भी बताउगा की किन – किन लापरवाही के कारण बीमारियाँ आती है , और हमे किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Children's health problem

जन्म के समय शिशु दूसरों पर निर्भर रहता है। जरा सी लापरवाही से उसे कई रोग हो जाते है। रोग की पहली अवस्था मेँ उपचार न होने पर रोग गंभीर हो जाता है। भिन्न – भिन्न रोगों कई रोगाणु भिन्न – भिन्न होते है। बच्चों मेँ होने वाले रोग निमोनिया ,पोलियो ,टी बी ,गलघोटू ,अतिसार, पेचिस ,,हैजा और छोटी माता आदि है।

निमोनिया (Nimoniya- Children’s health problem)

निमोनिया कोकस जीवाणुओं के कारण होता है। इसका समाप्ति काल 6 – 30 घंटे है।

लक्षण

  • रोगी को तेज बुखार होता है।
  • उसका मुँह लाल हो जाता है।
  • रोगी को खाँसी आती है।
  • उसकी छाती मेँ दर्द होता है।
  • रोगी को साँस तेजी से आता है।
  • रोगी को सीधा लेटने मेँ धिक्त महसूस होती है।

रोकथाम

  • रोगी को ठंड से बचना चाहिए।
  • उसको धूप व खुले स्थान पर रखना चाहिए।
  • रोगी को डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • उसके भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • रोगी को स्वस्थ बच्चों से अलग रखना चाहिए।

पोलियो (Poliyao – Children’s health problem)

पोलियो रोग विषाणुओं के कारण होता है।जो सुष्मना और नाड़ी संस्थान पर प्रभाव डालता है। यह अधिकतर बाल्यावस्था मेँ होता है। और यह जीवाणु रोगी व्यक्ति के थूक, आंव, छींक व खांसी द्वारा फैलता है।

Children's health problem

लक्षण

  • इसकी शुरुवाती तेज ज्वर से होती है।
  • रोगी का सिरदर्द होता है।
  • रोगी को बेचैनी महसूस होती है।
  • कई बार गर्दन मेँ अकड़ाव महसूस होता है।
  • इससे बच्चे के नाड़ी – संस्थान पर असर पड़ता है।

उपचार

  • बच्चों को सही समय पर व ठीक अंतराल पर पोलियो की दवाई पिलानी चाहिए।
  • तुंरत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • पानी व भोजन साफ और शुध्द देना चाहिए।
  • स्वस्छता का पूरा ध्यान देना चाहिए।
Children's health problem

गलघोटू (Glgotu – Children’s health problem)

यह एक अति भयानक रोग है। जो छोटे बच्चे विषेकर जो 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों पर अधिक असर डालता है। यह रोग कोरिने बैक्टीरियम डिप्थीरियम नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है। यह जीवाणु रोगी के गले ,मुँह व नाक के व्यर्थ पर्दार्थो में पाया जाता है।

लक्षण

  • इस रोग में गला खराब हो जाता है।
  • लसिका ग्रथिया बढ़ जाती है।
  • ऊपरी आंतरिक झिली पर सफेद पर्त जम जाती है।
  • जल्दी उपचार न कराने से गले में एक झिली बन जाती है।

रोकथाम

  • बच्चे को डी पी टी के टीको की तीनों खुराक सही समय व सही अंतर में देनी चाहिए।
  • यदि रोगी संक्रमण तृव है , तो संक्रमण अस्पताल में रखना चाहिए।
  • स्वस्थ बच्चों को रोगी से अलग रखना चाहिए।
  • उसके आस – पास सफाई का विशेष ध्यान रखे।

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पेचिस (pechis – Children’s health problem)

यह रोग गंदगी और सफाई संबंदी लापरवाही के कारण होता है। समय पर इलाज न होने पर यह रोग जानलेवा हो सकता है।

कारण

1. अमीबिक पेचिस

यह पेचिस एक कोशीय प्रजीवा एन्टीअमीबा हिस्टोइलिटिका द्वारा होता है। यह प्रजीवा सिस्टम के रूप में मल से बाहर आता है।

2. बेसिलरी पेचिस

यह पेचिस शिजेला जाति के अनुजीवियों द्वारा होता है। यह जीव में काफी समय तक जिन्दा रहते है। सूर्य की किरणों , विसंक्रमण पदार्थो में तथा सूखने पर समाप्त हो जाता है।

लक्षण

  • रोगी के पेट में ऐंठन और दर्द होता है।
  • पतले मल आते है।
  • प्यास अधिक लगती है।
  • अधिक दस्त लगने से रोगी के शरीर में पानी और खनिज लवण की कमी हो जातीं है।

रोकथाम

  • रोगी को पूर्ण विश्राम देना चाहिए।
  • रोगी को अच्छी तरह पकाया हुआ भोजन देना चाहिए।
  • खाने – पीने की वस्तुओं को ढ़क कर रखे।
  • उसके आस – पास सफाई का विशेष ध्यान रखे।

हैजा (heja – Children’s health problem)

यह गर्मी व वर्षा के मौसम में फैलता है। यह इतना भयानक होता है। की थोड़े ही समय में इससे बहुत अधिक लोग शिकार हो जाते है।

कारण

  • यह एक जीवाणु कोलेरा वाइब्रियो के कारण होता है।
  • यह जीवाणु नमी और 30 व 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अधिक तेज गति में वृद्धि करता है।
  • इससे रोगी को उलटी व मल अधिक आते है।
  • इस रोग के कीटाणु अशुद भोजन व पानी और सड़े – गले फल व सब्जियों के सेवन से शरीर में पहुंच जाते है।

लक्षण

  • रोगी को पतले मल आता है।
  • रोगी को बेचैनी होती है।
  • मुँह सूख जाता है।
  • जिहा सूख जाती है।
  • शरीर में अम्लीयता की मात्रा बहुत हो जाती है।

रोकथाम

  • रोगी को तुंरत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
  • रोगी को अच्छी तरह पकाया हुआ भोजन देना चाहिए।
  • खाने – पीने की वस्तुओं को ढ़क कर रखे।
  • उसके आस – पास सफाई का विशेष ध्यान रखे।
  • डॉक्टर की सलाह से हैजा का टिका लगवाना चाहिए।

छोटी माता (choti mata)

यह रोग समान्तया: शिशुओं में होता है। विषेशकर 10 साल से कम उम्र वाले बच्चों को होता है। यह बड़ो को इसलिए नहीं होता है , क्योकि जब यह रोग छोटी उम्र में हो जाता है ,तो फिर कभी – भी पूरी उम्र दुबारा नहीं होता है।

लक्षण

  • शुरू में हल्का बुखार होता है ,और कार्य करने में मन नहीं लगता है।
  • शरीर पर दाने निकल जाते है।
  • दिल खराब हो जाता है।
  • पीठ दर्द होने लगती है।
  • दानों पर तीन दिन में पपड़ी बन जाती है।

रोकथाम

  • बच्चों को छोटी माता का टिका लगवाना चाहिए।
  • शिशु को अलग रखना चाहिए।
  • रोगी के व्यर्थ को जला देना चाहिए।
  • रोगी को मिर्च – मसाला नहीं देना चाहिए।
  • रोगी को तरल भोजन देना चाहिए।

छोटे बच्चों के लिए टीकाकरण सूची

उम्र टिका
जन्म बी. सी. जी. , पोलिया पहली खुराक, हिपेटाइटस – बी पहला टिका
1½ मास डी. पी. टी. पहला टिका, पोलिया दूसरा टिका, हिपेटाइटस – बी दूसरा टिका
2½ मास डी. पी. टी. दूसरा टिका , पोलिया तीसरा टिका
3½ मास डी. पी. टी. तीसरा टिका , पोलिया चौथा टिका
6-9  मास पोलिया पांचवा टिका , हिपेटाइटस – बी तीसरा टिका
9  मास खसरे का टिका
15-18 मास खसरा, कनपेड़ और रूबेला का टिका
2  साल टाइफाइड टिका , डी. पी. टी.  पहला बूस्टर टिका
5 साल डी. पी. टी. दूसरा बूस्टर टिका
1-5 साल HIB दिमागी बुखार का टिका
10  साल पोलिया की खुराक, टाइफाइड बूस्टर टिका, हिपेटाइटस  बूस्टर टिका
1-12 साल छोटी माता का टिका

According to onlymyhealth

मोबाइल फोन से रखें दूर

मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या दिन-प्रतदिन बढती जा रही है और हर घर में एक से ज्यादा मोबाइल फोन का प्रयोग आम हो गया है। इलेक्टोमैग्‍नेटिक बायोलॉजी एंड मेडिसिन पत्रिका के शोध के अनुसार बच्चों का शरीर बडों की तुलना में रेडिएशन को आसानी से ग्रहण करता है। इसलिए बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें। मोबाइल फोन की तरंगे दिमाग के आसपास ज्यादातर होती हैं जो बच्चे के शरीर के उतकां में आसाना से आब्जर्व हो जाती है जिससे ब्रेन कैंसर होने का खतरा बढ जाता है।

FAQ

Q-गलघोटू रोग कितने वर्ष के बच्चों को अधिक होता है।
Ans-3 से 6 वर्ष के।
Q-छोटी माता रोग का टिका किस उम्र में लगाया जाता है।
Ans-12 वर्ष की उम्र में।
Q-ऐसा कौन – सा रोग है जो केवल एक बार ही होता है।
Ans-छोटी माता का।
Q-खसरे का टिका कब लगाया जाता है।
Ans-9 मास की उम्र में।
Q- HIB दिमागी बुखार का टिका का टिका कब लगाया जाता है।
Ans-1 से 5 वर्ष की उम्र में।

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