आखिर किन कारणों से नष्ट हो जाती है किडनियां kidney problems in hindi

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kidney problems in hindi

आज हम इस लेख में किडनी रोग के बारे में विस्तार से जानेंगे। कि किडनी खराब कैसे और क्यों होती है। किडनी खराब होने से शरीर में कौन – कौन से लक्षण उत्तपन होते है। इसके लिए हमे किन – किन सावधानियों की ओर ध्यान देना चाहिए। और इसके क्या – क्या उपचार है। जानिए पूरी जानकारी kidney problems in hindi.

kidney problems in hindi
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किडनी की बीमारी बिना किसी लक्षण के दब्बे पांव आती है। और कुछ करे इससे पहले ही सब कुछ खत्म हो जाता है। कई बार हम सुनते भी है। कि उस व्यक्ति की तो किडनी ही फेल हो गयी है। इस स्थिति में सिर्फ गुर्दे को बदलने का ही रास्ता रहता है। यह कई बार कामयाब हो जाता है। और कई बार गुर्दे बदलते समय रोगी की मृत्यु भी हो जाती है।

किडनी रोग (Kidney disease in hindi)

जो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति संचेत और जागरूक होते है। वह अपने शरीर का समय – समय पर डॉक्टरी जाँच करवाते है। लेकिन कई ऐसे भी लोग होते है। जिनको कोई बीमारी लग जाती है। तो उसके प्रति इतना ध्यान भी नहीं देते है। जिस कारण उनको बाद में अपनी मोत के साथ खेलना पड़ता है। इसी तरह किडनी के रोग को रोगी हल्के में लेता है। वह सोचता है, कि यह तो मामूली सी बीमारी है। थोड़ी – बहुत दवाईया लेने के बाद ठीक हो जायेंगी।

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बियर, सॉफ्ट ड्रिंक्स, दूध – दही इत्यादि पर्दार्थो में फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई किडनी रोगी इनका अधिक मात्रा में सेवन करता है। तो उसके खून में फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ जाती है। जिस कारण अस्थिया अधिक मात्रा में कैल्सियम खींचती है। जिससे किडनी कमजोर हो जाती है।

किडनी रोग के कुछ प्रमुख कारण ( Some of the major causes of kidney problems )

डायबिटीज

जिन व्यक्तियों को डायबिटीज की समस्या होती है। उनको भी किडनी के कमजोर होने का खतरा होता है। इसके बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होता है। कि जब उनको डायबिटीज की प्रॉब्लम है। तो इसके साथ – साथ उनकी किडनियों को भी खतरा है।

आनुवंशिकता

किडनी को प्रभावित और कमजोर करने का कारण आनुवंशिकता भी हो सकता है। जिन बच्चों के माता – पिता या दादा – दादी को किडनी की प्रॉब्लम थी। तो 30 % चान्स होते है। कि उनके बच्चों को भी यह समस्या हो सकती है। लेकिन कई बार ऐसा हो भी जाता है। और कई बार ऐसा कुछ नहीं होता है।

मूत्राशय के संक्रमण

जिनके शरीर में शक़्कर कि मात्रा अधिक होती है। उनके मूत्राशय में संक्रमण कि मात्रा भी पाई जाती है। जिस कारण समय बीतने के साथ – साथ व्यक्ति की किडनी भी खराब हो जाती है। या फिर कमजोर हो जाती है।

दर्द निवारक गोलियों का सेवन

जिन लोगों के सर, हाथ, कमर, पेट, घुटने, जोड़ो और पूरे शरीर के किसी भी अंग में दर्द होता है। तब व्यक्ति दर्द निवारक गोलियों का सेवन करते है। जिससे एक बार तो उनका दर्द चला जाता है। लेकिन लगातार और ज्यादा मात्रा में दर्द की गोलिया खाने से शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इससे किडनी और लिवर दोनों ही खराब हो जाते है।

नशे के कारण

जो लोग लम्बे समय से नशा करते है। और नशा बहुत अधिक मात्रा में करते है। उन लोगों का स्वास्थ्य बहुत जल्दी खराब हो जाता है। उनकी किडनी गल जाती है। उनके फेफड़े भी गल कर खराब हो जाते है। इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

किडनी में चोट लगने के कारण

किडनी में चोट आदि लगने के कारण मूत्राशय से मूत्र के बैक फ्लो यानि गलत दिशा में प्रवाहित होना। किडनी के लिए नुकसान दायक होता है। खानपान की वजह से भी किडनी खराब हो सकती है।

भौगोलिक कारण

किडनी रोग होने के पीछे भौगोलिक कारण भी है। जिस प्रकार हरियाणा और पंजाब में दूध और दूध से संबंधित उत्पाद का सेवन करते है। उसी प्रकार बिहार और समुंद्री तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग मछली का सेवन अधिक करते है। इनका अधिक मात्रा में और लगातार सेवन करने से किडनी रोग का खतरा बढ़ जाता है।

ब्लड प्रेशर

जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की बीमारी होती है। उसको किडनी रोग होने का खतरा भी अधिक रहता है। इस बात का अक्सर ब्लड प्रेशर रोगी को पता नहीं होता है।

मोटापे के कारण

किडनी के रोग का प्रमुख कारण मोटापे को माना गया है। जिस व्यक्ति का वजन अधिक होता है। उसका स्वस्थ वैसे भी स्वस्थ नहीं रहता है। इसी के कारण किडनी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

किडनी रोग के लक्षण (Symptoms of kidney problems in hindi)

हमारे शरीर में दो किडनी होता है। उनमें से यदि एक भी सही हो तो आप जीवित रह सकते है। लेकिन कई बार किडनी के खराब होने से निम्नलिखित लक्षण होते है।

  • शरीर में किडनी वाले स्थान पर दर्द होना।
  • रात के समय ब्लड प्रेशर का कम – ज्यादा होना।
  • मूत्र त्याग के समय मूत्र में खून आना।
  • साँस फूलना।
  • पीठ में दर्द ।
  • आँखे, चेहरे, पांव और त्वचा के अन्य हिंस्सों में जल जमाव के कारण सूजन दिखाई देना।
  • शाम के समय थकान का महसूस होना।
  • मूत्र कम मात्रा में आना।
  • पेट में दर्द होना।
  • प्यास अधिक लगना।
  • भूख कम लगना।
  • उल्टी आना।
  • पाचन शक्ति का कमजोर होना।
  • मांसपेशियों में दर्द।
  • सोने में कठनाई।
  • ध्यान लगाने में कठनाई।
  • दस्त लगना।
  • मूत्र त्याग के पैटर्न में बदलाव आना।
  • नींद न आना ।

किडनी रोग का उपचार (the treatment of kidney problems in hindi)

बैक्टेरिया के कारण किडनी में हुए संक्रमण को एंटी बायोटिक्स से भी ठीक किया जा सकता है। किडनी रोग के लक्षणों का समय पर पता चलते ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित उपचार और सावधानियां है-

  • समय पर डॉक्टर के पास जाने पर किडनी रोग का इलाज संभव है।
  • योग क्रिया द्वारा भी किडनी रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • अपने खान – पान की और विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • नियमित रूप से व्यायाम भी करना चाहिए।
  • अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • नशे से बचना चाहिए।
  • किडनी के रोगी को आलू, केला, संतरा, संतरे का रस, टमाटर, पालक और सॉफ्ट ड्रिंक आदि खाद्य पर्दार्थो से बचना चाहिए।

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