शीतली और शीतकारी प्राणायाम- Definition, benefits or method in Hindi

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What is sheetali Pranayam in hindi

आज हम शीतली और शीतकारी प्राणायाम के बारे में जानेंगे। कि (What is sheetali Pranayam in hindi) प्राणायाम क्या होता है। इसे करने से हमे क्या – क्या फायदा होता है। इन दोनों प्राणायामों के बीच क्या अंतर है। इनको करने से हमे कौन – कौन सी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

What is sheetali Pranayam in hindi
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What is sheetali Pranayam in hindi

शीतली प्राणायाम दो शब्दों से बनकर बना है शीतली + प्राणायाम जिसका अर्थ है- ठंडक पहुंचना यानि शरीर को ठंडा करना। इसको अंग्रेजी भाषा में Cooling Berth भी कहते है। शीतली प्राणायाम हमारे शरीर के लिए एक छायादार वृक्ष की तरह है। जो गर्मियों में हमारे शरीर को ठंडा रखता है। यह गर्मियों के मौसम में किया जाने वाला सबसे लोकप्रिय प्राणायाम माना जाता है।

शीतली प्राणायाम की विधि(Methods)-

सबसे पहले आप ज्ञान मुद्रा में बैठ जाएं। और अपने शरीर को ढीला छोड़ दें। अब अपनी जीभ को पूरा बहार निकालें। उसे दोनों किनारो से मोड़ते हुए नाली जैसा बनाएं। और रेचक करे। अब जीभ की नाली को गहरी श्वास से भरे। कुछ देर तक आंतरिक कुंभक करें। अब तीनो बंध लगाएं। अब श्वास को नाक के द्वारा धीरे – धीरे बाहर निकालें। इस क्रिया को तीन – चार बार दोहराएं।

तनाव दूर करने वाले योगासन

लाभ (Benefits of sheetali pranayam)

  • इससे मन शांत होता है।
  • चर्म रोग दूर होता है।
  • शरीर स्वस्थ रहता है।
  • श्वास संबंधी समस्या ठीक होती है।
  • रक्त का शुद्दिकरण होता है।
  • उच्च रक्तचाप में सहायक है।
  • शरीर को ठंडा करता है।
  • प्यास कम लगती है।
  • ह्दय रोग ठीक होता है।
  • चेहरे की सुंदरता बढ़ती है।
  • इससे अच्छी नींद आती है।
  • भूख अच्छी लगती है।

What is Sheetkari Pranayam in hindi

इस प्राणायाम की खास बात यह है कि इसको करते समय या साँस लेते समय ‘सि – सि ‘ या ‘सित’ की ध्वनि निकलती है। शीत का मतलब होता है ठंडकपन। और कारी का मतलब होता है उत्तपन करना। इस प्राणायाम को करने से हमे शीतलता प्रदान होती है। सर्दी में यह व्यायाम नहीं करना चाहिए। जबकि गर्मी में ज्यादा से ज्यादा हो सके उतना करना चाहिए।

शीतकारी प्राणायाम विधि(Methods)-

सबसे पहले आप पदमासन में बैठ जाएं। अब अपनी जीभ को मोड़ कर उसके अग्र भाग को स्पर्श करें। और उसी समय मुँह के द्वारा साँस को अंदर खींचें। इस समय सि – सि की ध्वनि उतपन होगी। अब जितना समय हो सके साँस को रोकें। फिर दोनों नासिका द्वारा श्वास को धीरे – धीरे छोड़े। और पुन: पहले की तरह साँस ले। इस कर्म को तीन से चार बार दोहराएं।

लाभ (Benefits of Sheetkari Pranayam )

  • शरीर में चुस्ती आती है।
  • सिर दर्द ठीक रहता है।
  • आँखों की रोशनी बढ़ती है।
  • मन शांत रहता है।
  • स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  • भूख, प्यास का अंत होता है।
  • आलस्य दूर होता है।
  • एकाग्रता बढ़ती है।
  • श्वास संबंधी बीमारियाँ ठीक होती है।
  • क्रोध नहीं आता है।
  • रक्तचाप कम करता है।
  • शरीर को स्वस्थ रखता है।

प्राणायाम

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