तितली आसन Titli aasan how to do it and its benefits in Hindi

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titli aasan how to do it and its benefits in Hindi

इस लेख में आप तितली या बद्धकोणासन आसन के बारे में जानेंगे। कि इस आसन को करने से क्या – क्या फायदा होता है। और इसके करने के लिए हमे कौन – कौन से steps follow करने है। यह आसन हमारे लिए कितना अधिक जरूरी है।

 titli aasan how to do it and its benefits in Hindi
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इसको करते समय हमे किन – किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इन सभी के बारे में हम विस्तार से जानेंगे। इसके लिए आप पूरा लेख पढ़े।इस आसन को बुद्धिकोणासन इसलिए कहा जाता है। क्योकि इसमें पांव के दोनों तलवे जन – नागों के पास, हाथों की मदद से जोर से पकड़कर एक विशेष कोण में साथ रखे जाते है। इसलिए इसको बुद्धिकोणासन आसन भी कहा जाता है।

तितली आसन या बद्धकोणासन

जैसा कि आप सभी जानते है। कि व्यक्ति के पास सबसे बड़ा ओर क़ीमती धन क्या होता है। यदि आप नहीं जानते हो, तो में आज आपको बता देता हूँ। कि किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा धन उसका शरीर होता है। जब किसी व्यक्ति का शरीर पूरी तरह से स्वस्थ होता है। तो वह बहुत अमीर आदमी माना जाता है। लेकिन किसी का शरीर रोगों से घिरा हुआ है। तो वह शारिरीक रूप से बहुत गरीब है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक रूप से अमीर होना चहाता है। इसके लिए उसे पहले प्रतिदिन योगासन करने होंगे। जिससे उसका शरीर स्वस्थ रहेगा।

तितली आसन करने की विधि (titli aasan how to do it and its benefits in Hindi)

  • इस आसन को करने की विधि इस प्रकार है।
  • सबसे पहले पैरों को सामने की और फैलाते हुए। सीधे बैठ जाएं, और अपनी शरीर की रीढ़ की हड्डी को सीधा रखे।
  • अब घुटनों को मोड़ें। और दोनों पैरों को श्रोणि की और लाए। पांव के तलवे एक – दूसरे को छूते हुए हो।
  • दोनों हाथों से अपने दोनों पांवो को कसकर पकड़ ले।
  • सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते है। ध्यान रखे की इस बीच आपको झुकना नहीं है।
  • एड़ी को जननांगो के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें।
  • लंबी, गहरी साँस ले। ध्यान रखना की साँस छोड़ते समय घुटने और जांघो को फर्श की और दबाएं।
  • तितली आसन में तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर – नीचे हिलाना शुरू करें। और इसकी धीरे – धीरे गति भी बढ़ाये।
  • इस प्रक्रिया को जीतना तेज हो सके। उतना ही तेज करना चाहिए। लेकिन बिना शरीर पर दबाब डालें।
  • फिर धीमा करते हुए। गहरी साँस ले। साँस छोड़ते हुए आगे की और बढ़े। ध्यान रखे की रीढ़ की हड्डी सीधा रहे।
  • कोहनी से जांघो का घुटनों पर दबाव डालें। जिसमे घुटने और जांघ जमीन को छुए।
  • जांघो के अंदरूनी हिस्से में खिंचाव महसूस करें। और लंबी – गहरी साँस लेते रहे।
  • मासपेशियो को अधिक विश्राम दे।
  • सांस छोड़ते धीरे से बहार आए। पैरों को सामने की और फैलाए, और विश्राम करें।

लाभ तितली आसन के (titli aasan how to do it and its benefits in Hindi)

  • इससे शरीर स्वस्थ रहता है।
  • शरीर को मजबूती मिलती है।
  • साँस संबंधी समस्या से छुटकारा मिलता है।
  • पेट रोगों के मुक्ति मिलती है।
  • मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा से आराम मिलता है।
  • घुटनों के दर्द में आराम आता है।
  • लंबे समय तक खड़े रहने और चलने की वजह से होने वाली थकान मिटती है।
  • तितली आसन से चिंता और मानसिक तनाव दूर होता है।
  • जोड़ो के दर्द को भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आपको प्रतिदिन तीन महीने यह आसन करना होगा।
  • पैरों की चर्बी को कम करता है। और दर्द भी ठीक करता है।

According to nari.punjabkesari.in

 गर्भावस्था में फायदेमंद
गर्भावस्था में तितली आसन करने से डिलीवरी के समय होने वाला दर्द कम होता है। प्रैग्नेंट महिलाएं इस आसन को पहले महीने से शुरू कर सकती हैं। इस आसन को करने से गर्भवती महिलाओं में तनाव भी कम होता है।

ध्यान रखने वाली बातें

तितली आसन को करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान और सावधानियाँ रखनी चाहिए।
साइटिका के मरीजों के यह आसन नहीं करना चाहिए।
यदि आप के घुटने में चोट लगी है। तो यह आसन चोट ठीक होने के बाद ही करें।
पीठ के निचले हिस्से में दर्द है। तो रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर ही यह आसन करें।
आसन करते समय पैरों को जोर – जोर से न हिलाये।

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